Monday, September 11, 2017

अभी वक्त है संभल जाओ......

आज जब मैं ये पोस्ट लिख रहा हूँ तो मैं अपने आप को रोक नही पा रहा हूँ। पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हो रहा है । उससे में और दुःखी हुआ हूँ । लेकिन शायद ये दुःखी होना ही काफी नही हैं। हर पांच वर्षों के बाद में किसी को वोट देता हूँ इस उम्मीद के भरोसे की ये मेरा नेता अच्छा काम करेगा देश का समाज के बारे में सोच कर चलेगा लेकिन । ठीक इसके उलट ही होता है जैसे पहले वाला करता था ठीक वैसे ही ये करने लगता है।

सभी नेता अपनी अपनी दुकानें चलाने में मस्त जनता चाहे भूकी मारे, बे इलाज मारे, बेरोजगार मारे, नेता जी तो मस्त। स्वम ही चोर और स्वंम ही कोतवाल बनकर जनता को बेवखूव पागल समझ्ते हैं। जैसे ईश्वर ने सारे जगत का ज्ञान हमारे नेताओं को ही दे दिया है कि मेट जी जो भी बोलेंगे वो ही सही मां लिया जाएगा।

परन्तु नेता जी भाड़े के टट्टूयो से वाह वाही लेने भर से काम नही चलने वाला। उनके अलावा भी जनता रहती है। समझदार है और बहुत अधिक समझदार है।

समय आने पर आपकी जो दशा होगी आप स्वंम भी रोने लायक नही बचेगे । रोना चाहोगे पर आपकी आंखों से आंसू माही गिरेंगे।

अभी भी वक्त है संभाल जाओ अपनी अपनी जिम्मेवारी सही से निभाओ।

अपनी दुकाने बंद करो !*************

शिक्षा, स्वास्थ, परिवहन, को सरकारी करो सभी प्राईवेट दुकाने तुरानी बंद करो।

ठेकेदारी प्रथा को तुरंत बंद करो

सभी को मजदूरों को उनकी मेहनत का सही मेहनताना दो।

लोगो को जाती, धर्म, भाषा, रंग, खानपान, इत्यादि के आधार पर मत बांटो।

इंसान हो तो इंसानियत अपनाओ ।

जानवर जो आपके अंदर छिपा है उसे मारो।

भारतीय परंपरा को आगे बढाओ । विश्व हमारा लोहा मानता है विश्व मे हमारी अलग छाप है। इसे बनाकर रखना हर भारतीय का कर्तव्य है।।

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