आर्थिक मंदी और बेरोजगारी- हाल के दिनो मे आर्थिक मंदी और बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। बाजार खस्ता हाल है और नौजबान बेरोजगार है बेहाल है। जो आकड़े आ रहे है चौकाने वाले हैं।
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में किसानों से ज्यादा बेरोजगारों ने आत्महत्या की है. साल 2018 में 12,936 लोगों ने बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी।
NCRB डाटा के मुताबिक देश में बेरोजगारी की वजह से साल 2018 में औसतन 35 लोगों ने रोजाना खुदकुशी की है. इस तरह से हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार खुदकुशी कर रहे हैं।
मैंने अपने ग्रामीण क्षेत्रों में एक मॉडल पाया कि जिस गांव में लोग गरीब होंगे अशिक्षित होंगे। उस गांव में कुछ परिवारों की दबंगई चरम पर होगी।
मुझे लगता है शायद ये ही हमारे नेताओं को समझ आगया है । शायद ये जो मंदी या बेरोजगारी है। यूँ नहीं है ये बहुत सोच समझकर सुनियोजित ढंग से की गई है ताकि हमारे नेता गरीबों और बेरोजगारों पर जीवन भर राज कर सकें।
शायद ये ही बजह है कि हमारे नेता मंदी और बेरोजगारी के बजाय हिन्दू - मुस्लिम, देशभक्ति-देशद्रोह , आतंकवाद जैसे मुद्दे को जनता के बीच मे फैला रहे हैं ताकि हम इन मुद्दों में उलझे रहे और सवाल न कर लें।
जनता को स्वंम सोचना है कि हम व्यर्थ के मुद्दों में उलझे रहें या फिर देश की आर्थिक स्थिति और बेरोजगारी के सवालों की बौछार करें। और देश के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करें।
और साथ ही देश में बंधुत्व की धारणा को शक्ति प्रदान करें।
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