Tuesday, October 21, 2014

दिवाली की शुभकामनायें

सभी देश वासियों को दिवाली की शुभकामनायें। दिवाली रौशनी, सम्रद्धि, खुशियों का त्यौहार है । सभी लोग इस ख़ुशी जाहिर करने के लिये खूब खरीद दारी करते है अपने घरों में रौशनी करते है ।

पर कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी झमता ऐसी नहीं नहीं है की वो रोज मर्रा की जिंदगी को भी ठीक से गुजार पायें इतना ही नहीं कुछ तो अब भी भूख मरी  के शिकार है उनके पास न घर है न कपड़ा है न ही खाने को भोजन है ।

आओ हम कोशिस करें की इस दिवाली हम उनकी जिंदगी में भी रौशनी करें जो समर्थ नहीं है 

Wednesday, July 23, 2014

शायद मुझे ये धोखा है कि हम इंसान हैं

धर्म की कट्टरवादी सोच
दोस्तों मैं बहुत ही विचलित हूँ कि यदि  इश्वर को धर्म या जाति की आवश्यकता होती तो वह हमरे शरीर पर कुछ लिखकर धर्म धरती पर भेजता जब उसने हमरे शरीर को इतना सुन्दर बनाया नाक , कान, मुंह आदि अंग दिए तो वो किसी हिस्से पर लिखकर भी भेज सकता था कि किस जाति या धर्म का है |कोई तो पहचान अवश्य बनाता | शायद इश्वर को इसके वारे में पता न हो या फिरइसे वेबजाह समझता हो |

मनुष्य भी एक प्राणी है बाकि सभी जीव जन्तुयों की तरह परन्तु खास इसलिए है की उसके पास विकासशील मस्तिष्क है और उस मस्तिष्क मनुष्य ने अपने विकाश और विनाश के लिए बहुत से कार्य किये हैं|
इसी विकाशशील मस्तिष्क ने मनुष्य को अपने आप को और बेहतर वनाने के लिए कुछ  नियम बनाये ताकि वह अनुशासित रह सके यही नियम समय बीत जाने के बाद जाति और धर्म का रूप धारण कर लिया | और जाति और धर्म ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया की वही मनुष्य के शत्रु हो गए |

तरह तरह के जाति और धर्मों का विकाश हुआ और ये आगे बढने और अपना अस्तित्व वचाने की आपा - धापी में इतने कट्टर हो गए की वे अपना मूल भूल गए |

और कट्टरता इस कदर बढ़ गयी की हम अपने आप को अपने धर्म का सैनिक और रक्षक बताने लगे और इतनी वर्वरता आगई की धर्म की लड़ाई में हम छोटी सी नन्ही जान को भी तलवार पर रखकर दो टुकड़े कर दिए | जिसे धर्म का अर्थ भी पता नहीं था | माँ , भाई, बाप के आँखों के सामने बहन बेटियों की अस्मत से खिलवाड़  किया | कभी जो बहन जिस हाथ पर राखी बांधा करती थी उसी हाथ ने उसकी अस्मत तार तार कर दिया |

मनुष्य ने जिस धर्म या जाति को अपने आप को अनुशासन में रहने के लिए बनाया वाही धर्म आज मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बन जाये |

मुझे नहीं चाहिए ऐसा धर्म और जाति जो मनुष्य का ही शत्रु बन जाए |

मैं इंसान हूँ मुझे इंसान ही रहने दो , परन्तु क्या हम इंसान है ?

शायद मुझे ये धोखा है की हम इन्शान हैं |
नोट: इस पोस्ट का मकसद किसी भी व्यक्ति विशेष की भावना को आहात करना नहीं है


Wednesday, February 5, 2014

खुद को सींचते रहें: सकारात्मक जीवन के लिए जरूरी 11 जीवन मूल्यों की शक्ति

खुद को सींचते रहें: सकारात्मक जीवन के लिए जरूरी 11 जीवन मूल्यों की शक्ति आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर अपने शरीर का ख्या...